मानवता का श्रेष्ठ उदाहरण -शाश्वत जाते जाते कर गया दो लोगों को नेत्रदान ,शोक में डूबे परिवार का साहस भरा फैंसला

बुरहानपुर - व्यक्ति के जीवन मे सबसे बड़ा दुःख जवान बेटे की मौत होता है। पहाड़ सा यह दुःख जो शायद कई दिनों तक भर भी नहीं पायेगा , ऐसे समय मे भी शोकसंतप्त  परिवार द्वारा मानवता और मानवीय संवेदनाओं के प्रति उस सोच को दर्शाता है जो आजकल यदाकदा ही दिखाई देती है।

आज प्रातः 9.30 बजे बुरहानपुर के ताप्ती नदी के राजघाट पर पानी मे डूबने से दो युवा छात्रों की मौत हुई है दौनों का पूरा परिवार सदमे में है परिवार जनों का रो रो कर बुरा हाल है , ऐसी विषम परिस्थितियों में भी कोई मानवता के प्रति गहरी सोच और आस्था रखता है यह देख कर ही दिल भर आता है और सिर आदर से नतमस्तक होना चाहता है।
जी हां आज हुई दुर्घटना में जिन दो बच्चों की जान गयी है 

उनमें से एक बच्चे शाश्वत सुधीर छापड़िया निवासी द्वारकापुरी की मां पूनम छापड़िया और पिता सुधीर छापड़िया की इच्छा है कि उनके बच्चे के नेत्रदान किये जायें ताकि दो ऐसे लोग जो देख नहीं सकते है  उन्हें नेत्र ज्योति मिल जाये और वह दुनिया देख पाएं , ऐसा करने से उस बच्चों की आंखों के माध्यम से उनके बच्चे की जीवंत यादें बनी रहेंगी।
ऐसी विषम परिस्थितियों में ऐसा कठोर निर्णय लेना सच में आम लोगों के लिए लेना बेहद मुश्किल है किंतु उनकी माँ और पिता ने सहर्ष यह ईच्छा जताई और नेत्रदान करवाने का साहसी निर्णय लिया है।
निर्णय के तुरंत बाद नेत्र चिकित्सालय के अधिकारियों व चिकित्सकों द्वारा नेत्र संग्रहित कर नेत्र बैंक में भेज दिया गया है।

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