हमारे पेट के अंदर हाइड्रोक्लोरिक एसिड प्राकृतिक रूप में मौजूद होता है और जब हम अत्यधिक एसिडिक भोजन लेते हैं, तो पेट में प्राकृतिक तौर पर मौजूद एसिड बढ़ जाता है और रासायनिक प्रतिक्रिया के फलस्वरूप रिफ्लक्स आता है या फिर पेट में गैस बनती है।
पेट द्वारा उत्पादित एसिड (पित्त) के बार-बार आहार नली में आने की वजह से एसिडिटी की समस्या होती है।
● अपने भोजन को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटे।
● भोजन को चबा-चबाकर धीरे धीरे खाएं।
● शरीर में पानी की कमी ना होने दें।
● नमक का सेवन कम करें।
● बहुत देर तक भूखे ना रहें।
● ताजा एवं हल्का गर्म भोजन करें,बासी भोजन से बचें।
● ज़रूरत से ज्यादा भोजन ना करें।
● नमक का सेवन कम करें।
● बहुत देर तक भूखे ना रहें।
● ताजा एवं हल्का गर्म भोजन करें,बासी भोजन से बचें।
● ज़रूरत से ज्यादा भोजन ना करें।
● भोजन के तुरंत बाद बहुत सा पानी ना पियें बल्कि लगभग 45 मिनट बाद ही पानी पियें।
● रात में अधिक समय तक ना जागें।
● चाय, कॉफी, एल्कोहॉल और सिगरेट का अधिक मात्रा में सेवन ना करेें।
● खानपान का अनियमित समय।
● अधिक दवाइयों के सेवन से बचें, खासतौर पर दर्द निवारक।
● मिर्च-मसालेदार और तैलीय भोजन,जंक फूड लेने से बचें।
● भोजन करने के तुरंत बाद ना सोएं।
● नियमित रूप से एक्सरसाइज करें।
● स्ट्रेस या तनाव से दूर रहें।
● बिस्तर पर जाने से करीब 2 घंटा पहले डिनर कर लें।
● हफ्ते में एक बार उपवास अवश्य करें।
● रात में अधिक समय तक ना जागें।
● चाय, कॉफी, एल्कोहॉल और सिगरेट का अधिक मात्रा में सेवन ना करेें।
● खानपान का अनियमित समय।
● अधिक दवाइयों के सेवन से बचें, खासतौर पर दर्द निवारक।
● मिर्च-मसालेदार और तैलीय भोजन,जंक फूड लेने से बचें।
● भोजन करने के तुरंत बाद ना सोएं।
● नियमित रूप से एक्सरसाइज करें।
● स्ट्रेस या तनाव से दूर रहें।
● बिस्तर पर जाने से करीब 2 घंटा पहले डिनर कर लें।
● हफ्ते में एक बार उपवास अवश्य करें।
● यदि आप बैठ कर बहुत देर काम करते हैं तो थोड़ी थोड़ी देर में उठ कर टहलने की आदत डालें।
● भोजन लेने के बाद थोड़ा ज़रूर टहलें।
● अमाशय का 1/3rd / 1/4th भाग रिक्त छोड़ें।
● भोजन धीरे धीरे शांत स्थान में शांतिपूर्वक, सकारात्मक एवं खुश मन से करें।
● भोजन करते समय गुस्सा होने या बातें करने से बचें।
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स्वास्थ्य समाचार