खण्डवा(शेख़ आदिल)- कुछ लोग आपदा में भी अवसर तलाश लेते हैं। खण्डवा की आवाज़ संस्था के अध्यक्ष अंशुल सैनी कोरोना महामारी की चपेट में आ जाने से गम्भीर रूप से बीमार हो गए थे।
वही 10 अप्रैल को मेरी तबीयत बहुत खराब हुई 15 अप्रैल को सरकारी अस्पताल में भर्ती हुआ 17 अप्रैल को हालत ज्यादा खराब होने पर इंदौरसिनर्जी अस्पताल भेजा गया यहां भी अस्पताल वालों ने ज्यादा सीरियस होने का हवाला दिया 2 दिन बाद मेरे पिताजी भी मेरे साइड वाले बेड पर आ गए इसके पहले मेरे आस-पास कोरोनावायरस 8 लोग मौत के मुंह में समा गए थे पिताजी को देखकर एक पल हो तो मुझे बहुत डर लगा परंतु अपने आप को संभाला 6 दिन भर्ती रहने के बाद मेरी रिपोर्ट खंडवा से पॉजिटिव भाई उसके बाद इंडेक्स अस्पताल शिफ्ट करा गया जहां से मैं 20 दिन बाद आया परंतु उसके 5 दिन बाद ही मेरे पिताजी का देहांत हो गया जिसके पश्चात मैं बहुत टूट गया था बहुत बुरा लगने लगा और अपने व्यापार को आगे बढ़ाने की एक चुनौती भी थी परंतु कहा जाता है कि जब भगवान दर्द देता है तो उसको सहने की ताकत भी होता है मैंने अपने व्यापार को नए सिरे से चालू करके इस चुनौती को स्वीकार किया पिछले 6 से 7 दिनों से अरविंद अस्पताल इंदौर से प्लाज्मा डोनेशन के लिए फोन आ रहा था मैंने अन्य डॉक्टर से पता करा कि यह पद्धति क्या है इस पद्धति में हमारे खून में स्थित कोरोना महामारी से लड़ने वाले एंटीबॉडी जिसे प्लाज्मा कहा जाता है को निकाला जाता है और जो गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति है उसको लगाया जाता है जिससे वह इस बीमारी से लड़ने में समर्थ हो जाता है और उसकी जान बच जाती है खंडवा में उपयोग में नहीं लाया जा रही है इंदौर भोपाल और दिल्ली से बड़े शहरों में ही उपयोग में ली जाती है मैं बहुत खुश हूं कि मुझे प्रथम बार डोनेशन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है 15दिन में दोबारा कर सकते हैं अपने पिताजी को समर्पित करता हूं।