हिंदी को ज्ञान-विज्ञान और तकनीक की भाषा बनाने की आवश्यकता : जकी अनवर अंसारी



बुरहानपुर, 20 जून। केन्द्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद् (सीसीआरयूएम), आयुष मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के अधीन नैदानिक चिकित्सा अनुसंधान इकाई, बुरहानपुर में शनिवार को हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का विषय “हिन्दी की वर्तमान स्थिति एवं भविष्य की संभावनाएं” रहा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय, शाहपुर-बुरहानपुर के समाजशास्त्र एवं राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष श्री जकी अनवर अंसारी ने अपने उद्बोधन में हिन्दी की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए डिजिटल युग में इसकी बढ़ती भूमिका को विस्तार से समझाया। उन्होंने प्रशासनिक कार्यों में हिन्दी के प्रभावी प्रयोग तथा भविष्य की संभावनाओं पर विचार व्यक्त करते हुए हिन्दी को ज्ञान-विज्ञान, तकनीक, शोध एवं नवाचार की भाषा बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ विद्यार्थियों के भविष्य का निर्माण एवं उनमें जागरूकता का विकास एक प्रकार की मौन क्रांति और समाज सेवा है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अनुसंधान अधिकारी एवं इकाई प्रभारी डॉ. यासमीन फातिमा ने की। उन्होंने कहा कि हिंदी कार्यशालाओं का उद्देश्य कर्मचारियों में हिन्दी में कार्य करने की झिझक को समाप्त करना तथा भाषा ज्ञान, टीम वर्क, समस्या समाधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने हिन्दी के अधिकाधिक उपयोग और संवर्धन के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि कार्यालयों में हिन्दी का व्यावहारिक प्रयोग न केवल कार्य को सरल एवं सुगम बनाता है, बल्कि कर्मचारियों के मध्य संवाद को भी अधिक प्रभावी बनाता है। अपनी भाषा में कार्य करने से आत्मविश्वास बढ़ता है तथा कार्य की गुणवत्ता एवं गति में भी सुधार होता है।

कार्यक्रम का संचालन श्रीमती दलजीत शर्मा ने किया। डॉ. मोहम्मद इमरान जावेद ने अनुसंधान इकाई का परिचय प्रस्तुत किया, जबकि हितेश सोनी ने आभार व्यक्त किया।

कार्यशाला में डॉ. मुबशरा खान, डॉ. मोहम्मद इमरान खान, अमन नागर, सिराज अहमद, गणेश अमोदे सहित इकाई के समस्त कर्मचारियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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