* मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है
* यह सभी ज्योतिर्लिंगों में सबसे ज्यादा अद्वितीय इसलिए है क्योंकि यहां भगवान शिव और माता पार्वती, दोनों ही मौजूद हैं
* मल्लिकार्जुन 52 शक्तिपीठों में से एक है यही पर माता सती के होठ का ऊपरी हिस्सा गिरा था
* मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में है
* मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग श्रीशैल पर्वत पर विराजमान है
* मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग कृष्णा नदी के तट पर स्थित है
* मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग को दक्षिण का कैलाश भी कहा जाता है
* अनेक धर्म ग्रंथों में इस स्थान की महिमा बताई गई है
* महाभारत के अनुसार श्री शैल पर्वत पर भगवान शिव का पूजन करने से अश्वमेघ यज्ञ करने का फल प्राप्त होता है
* कुछ ग्रन्थों में तो यहाँ तक लिखा है कि श्रीशैल के शिखर के दर्शन मात्र करने से दर्शको के सभी प्रकार के कष्ट दूर भाग जाते हैं
* कहां जाता है कि जब शर्त के अनुसार भगवान कार्तिकेय विवाह के लिए जब पूरे पृथ्वी का चक्कर लगा कर आते हैं तो भगवान गणेश का विवाह पूर्ण देखकर नाराज़ हो जाते हैं और क्रोंच पर्वत पर चले जाते हैं
* जब कार्तिकेय को मनाने के लिए भगवान शिव और पार्वती क्रोंच पर्वत पर जाते हैं तो उनके आगमन की खबर के कारण कार्तिकेय 36 किलोमीटर दूर चले जाते हैं तब शिव कौंच पर्वत पर ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हो जाते हैं और तभी से मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के नाम से प्रसिद्ध हुए
* मल्लिकार्जुन की दीवारों पर लिखी कहानी के अनुसार चंद्रवती नामक राजकुमारी थी जो जन्म से ही शाही ठाठ से रहती थी
* चंद्रवती ने सब कुछ त्याग कर अपना जीवन तपस्या में बिताने लगी वो कदाली जंग में ध्यान लगाएं हुए थी कि उन्हें कुछ महसूस हुआ
* उन्होंने देखा कि एक कपिला गाय बेल वृक्ष के पास है और अपने दूध से वहां के एक स्थान को धुल रही है ऐसा हर दिन होता था एक दिन जाकर वहां खुदाई की तो वहां शिवलिंग प्राप्त हुई
* चंद्रवती भगवान शिव की बहुत बड़ी भक्त थीं और जब उनका अंत समय आ गया था तो वो हवा के साथ कैलाश उड़ गईं थी और उनहें मोक्ष मिल गया था
* मल्लिका का अर्थ है माता पार्वती और अर्जुन का भगवान शंकर
* मंदिर के बाहर पीतल पाकर का सम्मिलित वृक्ष है
* दक्षिण भारत के मंदिरों के समान यहां भी मूर्ति तक जाने का टिकट कार्यालय से लेना पड़ता है
* यहां एक गुफा मे भैरवारि मूर्तियां भी है माना जाता है कि यह गुफा कई मिल गहरी है
* मंदिर से 2 मील दूर 51 शक्तिपीठों में से एक भ्रमराम्बारे देवी का मंदिर है
* मंदिर से 6 मील दूर शिखरेश्वर तथा हाटकेश्वर मंदिर है
* मंदिर के पूर्वद्वार से लगभग दो मील पर पातालगंगा है इसका मार्ग कठिन है एक मील उतार और फिर 852 सीढ़ियाँ है
* शिवपुराण के अनुसार अमावस्या के दिन भगवान शिव स्वयं यहां आते हैं और पूर्णिमा को उमादेवी यहां पर आती है
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