सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (गुजरात) द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक है क्या है उसका धार्मिक महत्व ?

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (गुजरात)
* सोमनाथ एक महत्वपूर्ण प्राचीन हिंदू मंदिर है जिसकी गिनती 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहले ज्योतिर्लिंग के रूप में होती है
* सोमनाथ मंदिर गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल शहर में समुंद्र के किनारे स्थित है
* इतिहास में यह मंदिर कई बार बनवाया गया और उसे हर बार किसी मुस्लिम शासक ने तोड़ दिया था
* वर्तमान में स्थापित मंदिर को आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने बनवाया था
* हिंदू ग्रंथों के अनुसार सोमनाथ मंदिर की स्थापना स्वयं सोमनाथ अर्थात चंद्रमा (चंद्र देव) ने करवाया था
* सोमनाथ का अर्थ होता है सोम (चंद्रमा) के नाथ (भगवान)
* सोमनाथ मंदिर के बारे में एक बात यह भी कही जाती है कि यहां पर भगवान श्रीकृष्ण ने प्राण त्याग कर स्वर्ग के लिए प्रस्थान किया था
* सोमनाथ मंदिर पहली बार किस समय में बनवाया गया इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है फिर भी यह जानकारी प्राप्त है कि 649 ईसवी में इसे वैल्लभी के मैत्रिक राजाओं ने दोबारा बनवाया था
* इस मंदिर को 725 ईसवी में सिंध के मुस्लिम सूबेदार अल जुनैद ने तोडवा दिया था
* 815 इसवी में प्रतिहार राजा नागभट्ट ने इस मंदिर को दोबारा बनवाया
* 1024 ईस्वी में महमूद गजनवी ने अपने 5000 साथियों के साथ इस मंदिर पर हमला कर दिया जिसमें उसने 25000 लोगों का कत्ल कर दिया और मंदिर की सारी धन दौलत लूट कर ले गया
* इसके बाद भीमदेव ने पुनः इस मंदिर को दोबारा बनवाया और 1093 में सिद्धराज जयसिंह ने मंदिर की प्रतिष्ठा करवाई और 1168 ईस्वी में विजयेश्वर कुमार और सौराष्ट्र के राजा ने भी सोमनाथ मंदिर का सौंदर्यीकरण करवाया
* 1297 में अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति नुसरत खां ने गुजरात पर हमला कर दिया उसने सोमनाथ मंदिर को तोड़ा और साथ ही पवित्र शिवलिंग को भी खंडित कर दिया
* 1395 में मुजफ्फर शाह ने और 1413 में अहमद शाह ने इस मंदिर को जमकर लूटा
* औरंगजेब ने मंदिर को 1665 और 1706 दो बार तोड़ दिया और हजारों लोगों को मारा
* आजादी के बाद 1950 में सरदार पटेल ने इस मंदिर का पुननिर्माण किया 1991 डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने ज्योतिर्लिंग की स्थापना की और 1962 में मंदिर पूरी तरह से तैयार हुआ
* 1995 राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया
* मंदिर के दक्षिण में एक स्तंभ है उसके ऊपर एक तीर रखकर संकेत दिया गया है कि सोमनाथ मंदिर और दक्षिण ध्रुव के बीच पृथ्वी का कोई भू भाग नहीं है
* चैत्र भाद्र कार्तिक माह में श्रद्धा का विशेष महत्व है यहां हर साल लगभग एक करोड़ लोग दर्शन करने को आते हैं
* सोमनाथ मंदिर की व्यवस्था और संचालन का कार्य सोमनाथ ट्रस्ट के अधीन है
* मंदिर के पास तीन नदियों हिरण, कपिला और सरस्वती का महासंगम है जिसे त्रिवेणी संगम कहते हैं
* मंदिर रोज़ सुबहे 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुली रहती है इस दौरान 3 आरतियां होती है
* सुरक्षा कारणों से यहां गैर हिंदुओं को जाने के लिए विशेष अनुमति लेनी पड़ती है

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