पुरानी चेकबुक जल्द बदलवा लें ! बड़े भुगतान में आ सकती है परेशानी , बड़े भुगतान से पहले नियम जरूर जानें


नई दिल्ली। अगर आप बैंकिंग लेन-देन के लिए चेकबुक का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। बैंक ऑफ इंडिया (BOI) समेत कई सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों की ओर से ग्राहकों को नई अल्फा-न्यूमेरिक कोड (Alphanumeric Code) वाली चेकबुक जारी की जा रही है। बैंकों द्वारा ग्राहकों को ईमेल और SMS के माध्यम से नई चेकबुक के लिए आवेदन करने की सलाह भी दी जा रही है।

31 दिसंबर 2026 के बाद बड़े चेक भुगतान पर असर

नए दिशानिर्देशों के तहत 31 दिसंबर 2026 के बाद 50,000 रुपये या उससे अधिक राशि वाले ऐसे चेक स्वीकार नहीं किए जाएंगे, जिन पर निर्धारित अल्फा-न्यूमेरिक कोड नहीं होगा। यह कोड अक्षरों और अंकों के विशेष संयोजन के रूप में होता है, जिससे चेक की पहचान और सत्यापन को अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।

इस व्यवस्था का उद्देश्य चेक में होने वाली हेराफेरी, जालसाजी और फर्जी चेक के जरिए होने वाली धोखाधड़ी के जोखिम को कम करना है। इसलिए जिन खाताधारकों के पास पुरानी चेकबुक है, उन्हें अपने संबंधित बैंक से इसकी स्थिति की पुष्टि कर समय रहते नई चेकबुक प्राप्त कर लेना चाहिए।

RBI का जोर तेज और सुरक्षित चेक क्लियरेंस पर

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) चेक क्लीयरिंग व्यवस्था को अधिक तेज और सुरक्षित बनाने पर लगातार जोर दे रहा है। Cheque Truncation System (CTS) के तहत भौतिक चेक की डिजिटल इमेज के माध्यम से क्लीयरेंस की प्रक्रिया को तेज किया जाता है। इससे चेक को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भौतिक रूप से भेजने की आवश्यकता कम होती है और भुगतान प्रक्रिया में लगने वाला समय घटता है।

नई चेकबुक के लिए देना पड़ सकता है शुल्क

नई चेकबुक जारी करने का शुल्क बैंक और खाते के प्रकार के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। उदाहरण के तौर पर बैंक ऑफ इंडिया के बचत खातों में एक वर्ष में 25 चेक पन्नों की एक चेकबुक मुफ्त दिए जाने की जानकारी दी गई है। निर्धारित सीमा के बाद अतिरिक्त चेक पन्नों के लिए शुल्क लागू हो सकता है।

अन्य सरकारी और निजी बैंकों में चेकबुक से जुड़े शुल्क अलग हो सकते हैं। इसलिए ग्राहकों को अपने बैंक की आधिकारिक जानकारी या शाखा से शुल्क की पुष्टि कर लेनी चाहिए।

चेक क्या है?

चेक बैंक द्वारा खाताधारक को उपलब्ध कराया जाने वाला एक लिखित भुगतान माध्यम है। इसके जरिए बिना बड़ी मात्रा में नकद राशि साथ रखे भुगतान किया जा सकता है। चेक में आमतौर पर प्राप्तकर्ता का नाम, राशि, तारीख और खाताधारक के हस्ताक्षर जैसी महत्वपूर्ण जानकारी होती है।

भारत में सामान्यतः चेक की वैधता चेक पर लिखी तारीख से तीन महीने होती है। भुगतान के लिए किए गए हस्ताक्षर बैंक के रिकॉर्ड में दर्ज हस्ताक्षर से मेल खाने चाहिए।

चेक के प्रमुख प्रकार

बेयरर चेक: जिस व्यक्ति के पास चेक होता है, उसे बैंक के नियमों के अनुसार भुगतान किया जा सकता है।

ऑर्डर चेक: चेक पर जिस व्यक्ति या संस्था के नाम भुगतान लिखा गया है, उसकी पहचान की पुष्टि के बाद भुगतान किया जाता है।

क्रॉस्ड चेक: ऐसे चेक पर दो समानांतर रेखाएं होती हैं। इसका भुगतान सामान्यतः सीधे बैंक खाते में किया जाता है, जिससे नकद भुगतान का जोखिम कम होता है।

चेक से भुगतान करने के फायदे

चेक के माध्यम से भुगतान करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बड़ी मात्रा में नकदी साथ लेकर चलने की जरूरत नहीं पड़ती। इसके अलावा चेक से किया गया लेन-देन बैंकिंग रिकॉर्ड में दर्ज रहता है, जिससे भुगतान का प्रमाण उपलब्ध रहता है।

यदि कोई चेक भुगतान के लिए प्रस्तुत होने के बाद पर्याप्त धनराशि न होने जैसी वजह से बाउंस हो जाता है, तो परिस्थितियों के अनुसार Negotiable Instruments Act, 1881 की धारा 138 के तहत कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

चेक भुगतान का रिकॉर्ड कारोबार, लेखांकन और ऑडिट के लिहाज से भी उपयोगी होता है। बड़े वित्तीय लेन-देन में बैंकिंग माध्यम का इस्तेमाल पारदर्शिता बनाए रखने में मदद करता है।

ग्राहकों के लिए जरूरी सलाह

अगर आप नियमित रूप से चेक के जरिए भुगतान करते हैं, तो अपनी चेकबुक की स्थिति और उस पर मौजूद सुरक्षा विशेषताओं की जांच कर लें। 31 दिसंबर 2026 की समयसीमा को ध्यान में रखते हुए अंतिम समय का इंतजार न करें। नई चेकबुक की जरूरत है या नहीं, यह अपने बैंक की आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल बैंकिंग, शाखा या ग्राहक सेवा से सुनिश्चित करें।

महत्वपूर्ण: अलग-अलग बैंकों में लागू नियम, शुल्क और चेकबुक की विशेषताएं अलग हो सकती हैं। इसलिए किसी भी पुराने चेक को बदलने या नई चेकबुक के लिए आवेदन करने से पहले अपने बैंक से वर्तमान नियमों की पुष्टि जरूर करें।

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