* बैद्यनाथ मंदिर झारखंड के देवघर में स्थित है
* देवघर का शाब्दिक अर्थ है देवी देवताओं का निवास स्थान
* बाबा बैद्यनाथ धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है
* इसे बाबाधाम के नाम से भी जाना जाता है
* यह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से नौवां ज्योतिर्लिंग है
* यह सबसे पवित्र ज्योतिर्लिंग है
* यह एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है जहां शिव और शक्ति एक साथ विराजमान है
* यहीं पर मां सती का ह्रदय कटकर गिरा था इसलिए इसे हार्दपीठ भी कहते है
* इस ज्योतिर्लिंग को मनोकामना लिंग भी कहते हैं क्योंकि यहां पर मांगी गई मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती है
* मान्यता है कि यह ज्योतिर्लिंग राक्षस राज रावण ने कैलाश पर्वत पर तपस्या के बाद शिव से वरदान स्वरुप प्राप्त किया था
* रावण इस लिंग को लंका ले जाना चाहता था पर शिव के शर्तों के अनुसार जमीन पर रखने के कारण यह यहीं पर विराजमान हो गया
* गुस्से में रावण इस लिंग पर अपना अंगूठा दबा दिया जिसके कारण लिंग जमीन के अंदर धंस गया है
* वैधनाथ ज्योतिर्लिंग सिर्फ 11 उंगली ऊपर की ओर है बाकी जमीन में धसा है
* शिव और शक्ति के इस मिलन स्थल पर ज्योतिर्लिंग की स्थापना खुद देवी-देवताओं ने की थी
* शिव पुराण और पद्म पुराण के पाताल खंड में इस ज्योतिर्लिंग की महिमा गायी गई है
* सावन के महीने में यहां पर मेला लगता है भक्त दूर-दूर से आकर यहां गंगा जल अर्पित करते हैं
* भक्त गंगाजल 105 किलोमीटर दूर सुल्तानपुर से लाते हैं
* भगवान श्री राम और हनुमान जी भी सावन मास के दौरान यहां कावड़ यात्रा की थी
* बैद्यनाथ मंदिर की स्थापना 1596 में की गई थी
* सर्वप्रथम इस खोए हुए शिवलिंग को बैजू नामक आदमी ने देखा था जिसके कारण इसका नाम बैद्यनाथ मंदिर रखा गया
* ऐसी प्रसिद्धी है कि वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की लगातार आरती दर्शन करने से लोगों को रोगों से मुक्ति मिलती है
* वैसे यहां हर रोज हजारों भक्त आते हैं पर सावन के महीने में यहां लाखों भक्त हर रोज आते हैं
* यहां की मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह किसी भी द्वादश ज्योतिर्लिंग से अलग है
* यहां के मंदिर के शीर्ष पर त्रिशूल नहीं बल्कि पंचशूल है जिसे शिवरात्रि व सावन में उतार दिया जाता है पूजा और स्पर्श के लिए
* यहां के मंदिर परिसर में वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के अलावा कुल 22 मंदिर हैं
* इस ज्योतिर्लिंग पर भक्त जलाभिषेक के बाद बाबा बासुकीनाथ मंदिर में जरूर जाते हैं
* मंदिर के पास एक तालाब है जिसमे तीर्थयात्री स्नान के बाद बाबा को जल चढ़ाते हैं इसी तलाब के निकट एक और तालाब है जिसमे कोई स्नान नहीं करता क्योंकि माना जाता है कि यह रावण के मूत्र से बना है
* नवदंपति या पहली बार बाबा के दरबार में आने वाले पति पत्नी बिना गठबंधन की रस्म कराएं नहीं जाते
* यहां का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा रांची है और सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन जसीडीह है
* यह सड़क मार्ग द्वारा भारत के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है
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